शौकिया ज्योतिषी

ज्योतिष जब व्यवसाय न हो कर शोख हो तो इसके कुछ फायदे भी है और तकलीफे भी | कई बार लोग हम से चालाकी करते है| लोग पुरे घरवालों के जन्माक्षर ले कर आ जाते है! कुछ तो ऐसे भी आते है जो हम पर उपकार जताते है| अपने बच्चों की कुंडली थमा कर चाय की चुस्की लेते लेते कहते है – ” अभ्यास करना .. आपको भी कुछ सिखने मिलेगा| “  कुछ आते है और आशा करते है की उनके जीवन में जंजीर फिल्म से जैसे अमिताभ बच्चन के जीवन में आया था ऐसा विशेष चमत्कार कब होगा यह हम खोज निकाले| मुफ्त में दिने वाले लोगो के प्रश्न खतम ही नहीं होते |शायद यही कारण है की ज्योतिषी मार्गदर्शन के लिए चार्ज करना शुरु करता होगा|

मुफ्त में ज्योतिष दिखने वाली बालाओं से छुटकारा पाने का मैंने एक तरीका आखीर खोज ही लिया| जब कोई वैसे ही आ धमकता है तो में दो या तिन बार उसे नजर अन्दाझ करता हूँ| उपेक्षा सह कर के भी जब कोई फिरसे आता है तो में समझ जाता हूँ की उसे वाकई कोई खास चिंता के उपाय की जरुरत है|

पहली सिटिंग में में उसकी समस्या को समज़ ने की कोशिश करता हू| प्रश्न करने वाले से उनकी समस्या का बारिक विश्लेषण करवाता हू | एकाद घंटा इस में निकल जाता है और समस्या को अच्छी तरह स्पष्ट रूप में समज ने के प्रयास में से ही उसका समाधान निकल आता है | अब समस्या अपने शुध्ध रूप में  ही शेष रह जाती है| अब उसमे कौन से ग्रहों का प्रभाव हो रहा है यह बात साफ़ निकल आती है | अक्सर मैंने देखा है की हर एक समस्या की जड़ इंसान के दिमाग से जुडी होती है| जब तक इंसान खुद यह साफ़ साफ़ समझ नहीं लेता, उसके व्यवहार में सुधार नहीं होता|

जब प्रश्न करने वाला सुशिक्षित होता है, में उसे जरुर यह समझाने की कोशिश करता हू की जैसे गुरु, मंगल आदि अवकाश के पिंड है; इंसान खुद भी एक पिंड है और अगर  ग्रह  पिंड अवकाश में रह कर भी उस पर असर डाल सकते है तो स्वयं रूपी पिंड सबसे ज्यादा असर कर सकता है| ‘यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे’ जो समझ जाता है उसे हालत ज्यादा तंग नहीं करते| अगर भुतकाल के कर्मों से आज का प्रारब्ध बना है तो आज के कर्मों से आने वाला भविष्य जरुर निर्माण हो सकता है|

कई उच्च शिक्षा प्राप्त लोगों को जब हम पूछते है की वो क्या पसंद करेंगे - अपनी समस्या को समझना या फिर कोई मंत्र टोटके से उपाय करना..?  तो यह लोग भी अबुधों की भाँती मंत्र टोटके का सहारा लेना पसंद करते है | गहरे पानी में डूबता इंसान जैसे अपने हाथ पैर पछाड़ता है वैसे ही मुश्किल हालत में अच्छे अच्छे लोगों की बुध्धि को ग्रहण लगा हुआ मैंने कई बार पाया है| जो मुश्किल में वह खूद फंसे है ऐसी ही मुश्किल में अगर कोई और होता तो ऐसे लोग जो आसानी से उसे मार्गदर्शन दे सकते है वही बात वो खुद अपने बारे में  करने को सक्षम नहीं होते|


जब इंसान तकलीफ में होता है तब तो मीनडी बन कर आता है लेकिन जैसे ही समस्या से मुक्त होजाता है -सिकंदर बन जाता है| अब  उसे यह बात खलने लगती है की ‘यह व्यक्ति ने मुझे निसहाय अवस्था में देखा है| ज्योतिषी को देख कर लघुता महसूस होती है.. शायद यही कारण है की बाद में वह ज्योतिषी से आँख चुराता है!