REMEDIES

  
 
Validity of Astrological Remedies
 
We believe that every cause brings in its corresponding effects without fail. The law of Karma is binding to all human beings. It is inviolable. On the other hand we believe in Astrology and its remedies. Astrology loses its utility in absence of Remedies. If there are no remedies; the mere knowing of future woud becomes incongrous and a curse.The conflict here is, if we believe in the lawa of karma; the remedies have no place leading to redundancy of Astrology itself.
 
Now the question arises; if law of karma is infallible; wheres the room for astrological remedies? Thus, it is imortant that we understand the role of astrological remedies  and the reason for them to sustain along the law of Karma over the ages.
 
In almost all cases, where a person seeks astrological advice, he is in a distressed state. He consults an astrologer when his own smartness has failed to bring in the desired attainments; when his logic has accepted defeat against the circumstances. Believe me, no one rememmbers an astrologer during success..! Even those, who once sought refuge to an astrologer for resolving their problems through remedies, as soon as they are out of the rough weather, put on their mask of self-arrogance and turn their back to the astrologer.
 
(draft under process) 
 
 
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ज्योतिष और उपाय
 
एक खास बात समझ लेनी जरुरी है की जातक जो कुछ भी चाहता है वो सारी चीजों की प्राप्ति हो पाए यह संभव नहीं होता| अगर यह संभव होता तो फीर भाग्य जैसी कोई चीज ही नहीं हो सकती | उपाय सिर्फ उसी के लिए हो सकते है जो चीज जातक के भाग्य में तो है पर उसकी प्राप्ति के आड़े कुछ बाधायें है| इसी बाधाओं को पहचानना ज्योतिषी का  खास काम है|
 
  • जातक इच्छित चीज की प्राप्ति के लिए कितना लायक है,
  • उपाय के बारे में उसकी कितनी श्रद्धा है और
  • उसे सहायक होने की ज्योतिषी की कितनी निष्ठां है
 
यह सारी बातें उपाय को कारगर होने व् नहीं होने को प्रभावित करती है | उपाय मूल रूप से दो तरह के होते है |
 
(१)  जातक की कुंडली में जो ग्रह अच्छे है उनको और बलवान करना और
 
(२)  जो ग्रह जातक की मनोकामना पूर्ती में अड़चन खड़ी करते हो उनको रिझाना |
 
किसी भी ग्रह के उपाय करने से पूर्व हमें जानना चाहिए की वह ग्रह नैसर्गिक रूप से किस किस बातों का घोतक है? कुंडली में इसकी स्थिति क्या निर्दिष्ठ करती है?  यह सुनिश्चित करना होगा की कुंडली में ग्रह की स्थिति कैसी है? कमजोर है या बलिष्ठ ? फायदेमंद है या नुकसानदेय ? क्या जातक के जीवन अनुभव या उसकी मनोस्थिति से उस ग्रह के लक्षण दिखाई देते है?
 
ज्योतिषीक उपायों में - ग्रहों के सुचित रत्न को धारण करना, ग्रहों के मंत्र के जाप, ग्रहों की सूचित चीजों का दान व् ग्रहों के अधिष्ठाता देवता की स्तुति, उपासना व् अनुष्ठान करना मुख्य है. अगर रत्न के चुनाव में गलती होती है तो नुकसान भी हो सकता है जब की देवता के स्तुति मंत्र जप व् अनुष्ठान से उलटा असर होने का खतरा नहीं होता. 
 
यहाँ ग्रहों के प्रतिकूल होने के लक्षण दिए गए है ताकि जिसे ज्योतिष का उचित ज्ञान नहीं है ऐसे व्यक्ति भी अपने अनुभव के आधार पर यहाँ दिए गए उपाय करके लाभान्वित हो सके. 
 

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