* मांगलिक दोष का हौवा *


  


* मांगलिक दोष का हौवा *

'मांगलिक दोष' यह शब्द ही अपने आप में विरोधाभासी है - 'मांगलिक' का तात्पर्य है 'शुभत्व' से जब की 'दोष' का तात्पर्य है 'अशुभ' से . भला मांगलिक और दोष साथ साथ कैसे हो सकते है? जिस ग्रह का नाम ही 'मंगल' हो वह भला कैसे दोष सर्जन कर सकता है?

लेकिन ज्योतिष में कुछ ऐसा ही भ्रम कायम हो गया है. शादी विवाह इच्छुक युवा युवातिओं को और उनके अभिभावकों को कुंडली मिलाप में मांगलिक दोष सबसे बड़ा विघ्न साबित हो रहा है. इसी दोष के कारन ऐसे कई युगल शादी के पवित्र संबंध से वंचित रह जाते है जो अन्यथा सब तरह से एक दूसरे के लिए श्रेष्ठ हो सकते थे. समाज के सभी वर्गों में अब कुंडली मिलाने का प्रचालन बढ़ रहा है और इसके साथ साथ मांगलिक दोष की अवधारणा भी बढ़ते बढते एक फोबिया का रूप धारण कर रहा है.

मांगलिक दोष के बारे में व्यापक गैरसमज को मिटाने के लिए इसे अच्छी तरह समजना बहोत ही जरुरी हो जाता है.

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार  पाप ग्रहभी यदि स्व , उच्च, मित्र राशि नवांश, वर्गोत्तम, शुभ ग्रह युक्त , शुभ ग्रह से दृष्ट हों तो योग कारक होते हैं | कहीं पर भी सिर्फ ग्रह कौनसे स्थानमें स्थित है इतना ही देख कर  फलादेश करना नहीं बताया जाता - अर्थात ग्रह कौनसी राशिमे है, किसके साथ सम्बन्ध बना रहा है  नीच राशिः में है  या उच्च में ,मित्र राशिः में है  या शत्रु में, ग्रह की अवस्था कैसी है - बालक है, युवा है या वृद्ध या सुशुप्त ये सारी बातों को तराशा जाता है| 

 
लेकिन  मांगलिक दोष को जन्म कुंडली में बिठा देने के लिए सिर्फ मंगल 1,4,7,8,12 वें भावः स्थित हो इतना ही काफी समजा जाता है और ऐसे जातक  को मंगली कहा जाता है | 
 

किसी भी रिवाज, नियम या क़ानून का औचित्य समझ ने के लिए हमें उस देश-काल को समझ ना होगा जब वे बनाए गए| मंगल सम्बन्धी नियम पुराने समाज की देन है जब

- समाज कृषि आधारित हुआ करता था|
- बड़ी लड़ाई या युद्ध हुआ करते थे|
- लोगों की अवसत आयु कम थी |
- मृत्यु की दर काफी ऊँची थी |
- आज की तुलना में समाज अधिक
   पुरुष प्रधान  हुआ करता था|
 
 
अब जरा मंगल ग्रह को जो चीजों का घोतक समजा जाता है इसे भी देखें -

- जमीन व् कृषि
- उहापोह शक्ति व् तर्क
- ऊर्जा, शौर्य व् हिंसा
- सिपाही व् युवा
ज्यादा युद्ध होंगे तो ज्यादा लोग शहीद होगें |
यद्ध में वह ही जाएगा जो युवा हो और शूरवीर भी या यूँ कहीये की मंगल प्रधान व्यक्ति युद्ध में जाने के लिए अग्रसर होगा| शायद यही कारण था की मंगल को पति/पत्नी के वैधव्य के साथ जोड़ा गया था|

जब समाज पुरुष-प्रधान हो तो भला शक्ति, व् उहापोह कर सके ऐसी पत्नी कोई कैसे स्वीकार करता ? मंगल के सामर्थ्य वाली पत्नी को खेत में अपने से ज्यादा काम करती देखने से पुरुष का स्वाभिमान टूट सकता था|

अगर हम आज के परिप्रेक्ष में उक्त कारणों को जांचे तो यह स्पष्ट हो सकता है की आज मांगलिक दोष का औचित्य नहीं रह गया| अब हर क्षेत्र में लड़कियां लड़कों की बराबरी कर रही है|
 
उच्च अभ्यास और व्यावसायिक क्षमता तेज मंगल के सिवा कैसे संभव होते ?
 
दूसरी और जब दोनों पति/पत्नी रोजगार में जुड़े हो - आपसी समझदारी ने पुरुष के ईगो ने यथा संभव समझोता करना मंजूर कर लिया है| इसी कारण मांगलिक दोष पर पुन:विचार करना जरुरी हो जाता है |
 
ज्योतिषी एक मंगली वर/ वधु को दूसरे मंगली वर/वधु के साथ शादी करवाने की सलाह देते है मगर यहाँ समाजवादी विचार से ज्यादा कुछ नहीं है | जहाँ दो घरोमे मंगल की असर होनिथी वहाँ एक घर में होगी यह बात तो ठीक है पर जब दोनों वर वधु मंगल के प्रभावमे होंगे तो इक्कठी असर बहुत भयंकर स्वरूप ले सकती है - इस हकीकत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए| इससे विपरीत - अच्छा तो यह होता की एक मंगली हो तो दूसरा मंगली न हो - कमसे कम जब एक मंगलके प्रभावसे उग्ररूप धारण करें तब दूसरा शांत तो रह पाता..!
 
जन्म कुंडली जन्म लग्नसे देखने के साथ साथ कुछ लोग चन्द्र लग्नसे 1,4,7,8,12 वें भावः स्थित मंगल को भी मांगलिक दोष गिनते है | इस तरह कुंडली में मांगलिक दोष बनाने की संभावनाए डबल हो जाती है |
 
चौबीस घंटे में १२ लग्न बनते है इस हिसाबसे हर कोई दिन पैदा होने वाले बच्चो मेंसे 33% से ज्यादा बच्चे मंगली बन जाएंगे और चन्द्र 27 दिनमे सारी रशिओसे भ्रमण कर लेता है - तब कोई भी महीने के 12 दिन तो ऐसे ही होंगे जिसमे चंद्रसे मंगल 1,4,7,8,12 वें भावमें होगा..  अब तो मंगली होने की संभावना और अधिक हो जाएगी | 
 
जरा सोचिए, क्या इतनी बड़ी संभावना वाले योग को दोष माना जाना चाहिए ?