अंत:स्फ्रुणा
(शेष)


अब एक संभावना बन गई की ज्योतिष का जब बहुत अभ्यास हो जाता है, कुंडली देखने मात्र में अचेतन मन उसका बहुत शीघ्र ही विश्लेषण कर लेता है और उसी में से जन्म लेता है इनटयुशन जो ज्योतिषिक तर्क से परे होता है|
 
ऐसे  अनुभवों के बाद मेने  इनटयुशन सिख्न ने के लिए प्रयास किये| कई किताबे पढ़ी जिसमें से थियोसोफि की एक किताबमे मुझे अच्छी जानकारी मिली| मुझे जान कर आश्चर्य हुआ की उसमे अंतर-स्फ्रुणा की जाग्रत होने के लिए जो इंसानी गुणों को जरुरी बताये  गए थे, वे गुण मेरेमे मेरे जीवन की घटनाओने  पैदा कर लिये थे इन गुणों में मुख्यत: 'नि:स्वार्थ होना, मन व् ह्रदय की शुद्धि, दुसरोकी मदद करने की अदम्य भावना, ईश्वरीय व् उच्च शक्तियों में विश्वास, और निराभीमानी होना शामिल  है |
 
यह बात में अच्छी तरह मानने लगा की भविष्य कथन कुंडली का मोहताज नहीं होता| कुंडली का ज्ञान व्  ग्रह-नक्षत्र तो निमित्त मात्र है असली जवाब तो अंदर से आते है|
 
दूसरी संभावना यह हो सकती है की एक कोई ऐसी अदृष्ट शक्ति भी है जो भविष्य की जानकारी को उजागर होने या न होने देने को संकलित करती हो| इसी लिए कुंडली गलत भी बनी हो तबभी उसमे से सच्ची बातें भी बताई जाती है.. और तभी तो बिना कोई ज्योतिषीय तर्क के भी निष्पादित कथन सच्चे होते है |
 
में यह भी मानने लगा की उच्चत्तर साधन का प्रयोग रोज मर्रा की छोटी मोटी इच्छाओं की पूर्ति के लिए करना ठीक नहीं होगा |
 
इच्छित उद्देश्य की प्राप्ति के लिए करने योग्य सभी पुरुषार्थ कर लेने के बावजूद भी जब परिणाम न मिले और इस वजह से  इंसान सचमुच काफी दुखी हो रहा हो तब ही इस रास्ते मार्गदर्शन हेतु प्रयास करना  उचित होगा|